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Showing posts from August, 2020

ब्रह्मचारी रहना कोई भक्ति मार्ग नहीं

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🌿 *ब्रह्मचारी जीवन बिताने मात्र से मुक्ति नहीं होती!* 🌿 सुकर्मी पतिब्रता के अंग का सारांश :-  दुर्वासा के ये वचन सुनकर परमात्मा जी हँसने लगे और बोले कि ऋषि! तू ज्ञानहीन है। अंबरीष के दरबार में झगड़ा क्यों किया? अंबरीष राजा तो पूर्ण रूप से मेरे में समर्पित है। सत्य वक्ता है। हे दुर्वासा! तुम तो ज्ञान के वाद-विवाद करने वाले महिमा के भूखे फिर रहे हो। अंबरीष को निरगुण तथा सरगुण दोनों प्रकार की साधना का ज्ञान है। हे ऋषि देव! वे उस सर्व ज्ञान को अपने (उर) हृदय में छिपाऐ हुए है। कोई जानना चाहता नहीं तो किसको भेद बताएँ? हे ऋषि! तुम शीघ्र अंबरीष के दरबार में जाओ। तुम्हारा सब अज्ञान अंधेरा समाप्त हो जाएगा। तुम्हारा कल्याण हो जाएगा। हे ऋषि दुर्वासा! तुम अंबरीष के दरबार में जाकर उनके चरणों में गिरो। वे संकट के मोचन करने वाले हैं। अचला के अंग की वाणी का सारांश :- संत गरीबदास जी बता रहे हैं कि दुर्वासा कैसे बच सकता था? वह तो एक महान आत्मा अंबरीष का चोर था यानि अंबरीष के यथार्थ ज्ञान को सुनकर भी अपने अहंकार का प्रदर्शन किया। वह तो परमेश्वर जी बीच में आ गए, अन्यथा सुदर्शन चक्र तो बहुत शक्तिशाली है।...

भागवत गीता का असली अर्थ

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तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज द्वारा श्रीमद्भगवद गीता का वास्तविक अर्थ  Spiritual Leader Saint Rampal Ji  इसमें श्रीमद्भगवत गीता के ज्ञान का यथार्थ प्रकाश किया गया है। ऐसे आज तक किसी हिन्दू धर्म के गुरू ने तथा गीता के अनुवादकर्ता ने नहीं किया। सबने भोले हिन्दू समाज को भ्रमित करके उल्टा पाठ पढ़ाया है। मेरा मानव समाज से निवेदन है कि इन झूठे गुरूओं की मेरे साथ आध्यात्मिक ज्ञान चर्चा करवाऐं। तब पता चलेगा ज्ञानी और अज्ञानी का। इस पुस्तक को ध्यानपूर्वक दिल थामकर पढ़ें। आप स्वयं समझ जाओगे कि माजरा क्या है? इसी पुस्तक में लिखी सृष्टि रचना में तथा गीता के सारांश में आप जी को श्री ब्रह्मा, विष्णु, महेश जी के माता-पिता तथा देवी दुर्गा के पति कौन हैं? आदि का ज्ञान भी होगा जिससे आज तक अपने धर्मगुरू नहीं बता पाए जो अपने ही ग्रन्थों में लिखे हैं। श्रीमद्भगवत गीता चारों वेदों (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद) का संक्षिप्त रूप है। दूसरे शब्दों में गागर में सागर है। चारों वेदों में अठारह हजार (18000) श्लोक (मंत्र) हैं। उनको गीता में 574 श्लोकों में लिखा है। जिस कारण से गीता में सांकेतिक शब्द...