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ब्रह्मचारी रहना कोई भक्ति मार्ग नहीं

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🌿 *ब्रह्मचारी जीवन बिताने मात्र से मुक्ति नहीं होती!* 🌿 सुकर्मी पतिब्रता के अंग का सारांश :-  दुर्वासा के ये वचन सुनकर परमात्मा जी हँसने लगे और बोले कि ऋषि! तू ज्ञानहीन है। अंबरीष के दरबार में झगड़ा क्यों किया? अंबरीष राजा तो पूर्ण रूप से मेरे में समर्पित है। सत्य वक्ता है। हे दुर्वासा! तुम तो ज्ञान के वाद-विवाद करने वाले महिमा के भूखे फिर रहे हो। अंबरीष को निरगुण तथा सरगुण दोनों प्रकार की साधना का ज्ञान है। हे ऋषि देव! वे उस सर्व ज्ञान को अपने (उर) हृदय में छिपाऐ हुए है। कोई जानना चाहता नहीं तो किसको भेद बताएँ? हे ऋषि! तुम शीघ्र अंबरीष के दरबार में जाओ। तुम्हारा सब अज्ञान अंधेरा समाप्त हो जाएगा। तुम्हारा कल्याण हो जाएगा। हे ऋषि दुर्वासा! तुम अंबरीष के दरबार में जाकर उनके चरणों में गिरो। वे संकट के मोचन करने वाले हैं। अचला के अंग की वाणी का सारांश :- संत गरीबदास जी बता रहे हैं कि दुर्वासा कैसे बच सकता था? वह तो एक महान आत्मा अंबरीष का चोर था यानि अंबरीष के यथार्थ ज्ञान को सुनकर भी अपने अहंकार का प्रदर्शन किया। वह तो परमेश्वर जी बीच में आ गए, अन्यथा सुदर्शन चक्र तो बहुत शक्तिशाली है।...

भागवत गीता का असली अर्थ

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तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज द्वारा श्रीमद्भगवद गीता का वास्तविक अर्थ  Spiritual Leader Saint Rampal Ji  इसमें श्रीमद्भगवत गीता के ज्ञान का यथार्थ प्रकाश किया गया है। ऐसे आज तक किसी हिन्दू धर्म के गुरू ने तथा गीता के अनुवादकर्ता ने नहीं किया। सबने भोले हिन्दू समाज को भ्रमित करके उल्टा पाठ पढ़ाया है। मेरा मानव समाज से निवेदन है कि इन झूठे गुरूओं की मेरे साथ आध्यात्मिक ज्ञान चर्चा करवाऐं। तब पता चलेगा ज्ञानी और अज्ञानी का। इस पुस्तक को ध्यानपूर्वक दिल थामकर पढ़ें। आप स्वयं समझ जाओगे कि माजरा क्या है? इसी पुस्तक में लिखी सृष्टि रचना में तथा गीता के सारांश में आप जी को श्री ब्रह्मा, विष्णु, महेश जी के माता-पिता तथा देवी दुर्गा के पति कौन हैं? आदि का ज्ञान भी होगा जिससे आज तक अपने धर्मगुरू नहीं बता पाए जो अपने ही ग्रन्थों में लिखे हैं। श्रीमद्भगवत गीता चारों वेदों (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद) का संक्षिप्त रूप है। दूसरे शब्दों में गागर में सागर है। चारों वेदों में अठारह हजार (18000) श्लोक (मंत्र) हैं। उनको गीता में 574 श्लोकों में लिखा है। जिस कारण से गीता में सांकेतिक शब्द...

रानी इंद्र मति को कबीर परमेश्वर द्वारा शरण में लेना

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कबीर साहेब चारों युगों में आते हैं सतयुग में  सत सुकृत नाम से  द्वापर में  करुणा में नाम से त्रेता में  मुनेंद्र नाम से कलयुग में  कबीर नाम से  इस प्रकार परमात्मा  अपने भक्तों को  शरण में लेते हैं  जैसे Iद्वापरयुग में कविर्देव (कबीर साहेब) का करूणामय नाम से प्राकाट्य परमेश्वर कबीर (कविर्देव) द्वापर युग में करूणामय नाम से प्रकट हुए थे। उस समय एक वाल्मीक जाति में उत्पन्न भक्त सुदर्शन सुपच (अनुसुचित जाति का) उनका शिष्य हुआ था। इसी सुदर्शन जी ने पाण्डवों की यज्ञ सफल की थी। जो न तो श्री कृष्ण जी के भोजन करने से सफल हुई थी, न ही तेतीस करोड़ देवताओं, अठासी हजार ऋषियों, बारह करोड़ ब्राह्मणों, नौ नाथों, चैरासी सिद्धों आदि के भोजन खाने से सफल हुई थी। भक्त सुदर्शन वाल्मीक पूर्ण गुरु जी से वास्तविक तीन मंत्र प्राप्त करके सत साधना गुरु मर्यादा में रहते हुए कर रहा था। द्वापर युग में इन्द्रमति को शरण में लेना द्वापरयुग में चन्द्रविजय नाम का एक राजा था। उसकी पत्नी इन्द्रमति बहुत ही धार्मिक प्रवृति की औरत थी। संत-महात्माओं का बहुत आदर किया करती थी। उ...

सच्चा रक्षक कौन है

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 सच्चा रक्षक कबीर परमात्मा है जो अपने भक्तों की हर पल रक्षा करते हैं और पूर्ण संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा बताए हुए भक्ति से कबीर परमात्मा मुक्तिधाम से आकर हमारी रक्षा करते हैं हमें सुख दुख में साथ देते हैं वही सच्चा रक्षक अर्थात हमारा परम पिता होता है जो हमारे मन की बात सुनता है अविनाशी कबीरजी🙏🙏 अविनाशी - जिसका नाश (जन्म-मरण) ना हो। कबीर परमेश्वर जी ने मां के पेट से जन्म नही लिया, वे सतलोक से सहशरीर (काशी शहर में) आये थे और सहशरीर ही (मगहर से) चले गए थे। इस समय फिर कबीर परमेश्वर,  संत रामपाल जी के रूप में सभी को अपने वास्तविक घर ले जाने के लिए आये हुए हैं।😘😘 सभी उनका सत्संग सुनकर उनको पहचानें और अपना तथा अपने परिवार का कल्याण करवाएं।🙏🙏🙏 सत्संग सुनें - साधना टी. वी. पर शाम 7:30 से 8:30 तक www.jagatgururampalji.org  से प्राप्त कर सकते हैं

बहुत ही गहरा ज्ञान है कबीर परमात्मा का

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संत रामपाल जी महाराज ने कबीर साहिब जी के तत्व ज्ञान का पूरा भेद खोला और यह तत्वज्ञान आज हमें नहीं मिलता तो हम भी पशु जैसा जीवन जी रहे होते लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने बहुत बड़ा उपकार किया देश और विदेश पर जिनके ज्ञान के बल और श्रद्धा भक्ति के प्रभाव और उनके आशीर्वाद से भगत समाज बहुत सुखी हो रहा है और सतलोक की वास्तविक भक्ति कर रहा है जिन्होंने अभी उपदेश नहीं लिया है वह तो आन उपासना करके अपना मनुष्य जीवन व्यर्थ में गंवा रहे हैं ,पता नहीं उनको कब समझ में आएगा और कब वह सत भगती शुरू करेंगे क्योंकि कबीर साहिब जी ने कहा है , मनुष्य जन्म दुर्लभ है ,मिले ना बारंबार ।। जैसे पत्ता टूट गिरे ,बहूर न  लगता डार।।  तो आप कब समझोगे इस तत्व ज्ञान को और कब सत भगती  शुरू करोगे इस समय किया गया पूर्ण गुरु को दान और सेवा बहुत काम आएगी।  कबीर साहेब जी की वाणी कहती है , मात पिता मिल जाएंगे ,लख चौरासी के मांय।  सतगुरु सेवा और बंदगी फिर मिलन की नाहीं।। अति शीघ्र संत रामपाल जी महाराज की पुस्तक ज्ञान गंगा, जीने की राह पढ़े साधना टीवी पर रोजाना शाम को 7:30 बजे सत्संग देखें और ...

मीराबाई को सद्बुद्धि से परिचित करके शरण में लेना

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🌺 "मीरा बाई को शरण में लेना"!! 🔅परमेश्वर कबीर साहेब कहते हैं कि मैं भक्त आत्माओं को शरण में लेने के लिए सौ छल-छिद्र कर लेता हूँ! गरीबदास जी की भी वाणी है- सौ छल-छिद्र मैं करू, अपने जन के काज। गरीबदास ढूंढत फिरूं, हीरे माणिक लाल।। मीरा बाई पहले श्री कृष्ण जी की पूजा करती थी। एक दिन कबीर साहेब का सत्संग सुना और कबीर जी के कहने से संत रविदास जी को गुरू बनाया। फिर अंत में कबीर जी को गुरू बनाया। तब मीरा बाई जी का सत्य भक्ति का बीज बोया गया। गरीब, मीरां बाई पद मिली, सतगुरु पीर कबीर। देह छतां ल्यौ लीन है, पाया नहीं शरीर।। www.jagatgururampalji.org

कबीर परमात्मा की लीलाएं

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🙏🏻शेखतकी ने जुल्म गुजारे, बावन करी बदमाशी, खूनी हाथी के आगे‌ डालै, बांध जूड अविनाशी, हाथी डर से भाग जासी, दुनिया गुण गाती है। शेखतकी ने अविनाशी को मारने के लिए खूनी हाथी के आगे  डाला। हाथी कबीर भगवान के पास जाते ही डर कर भाग गया। तब लोगों ने कबीर साहेब की जय-जय कार की। कबीर भगवान अविनाशी है। www.jagatgururampalji..org